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स्वयं की ऊर्जा और ताकत का अनुभव :

विषय के बारे में:

  अक्सर हम अपनी दैनिक दिनचर्या में अनवरत बहते चले जाते है। कभी - कभी  स्वयं का पता नहीं हो पाता कि हम जीवन में किस लक्ष्य को पाने के लिए चल पड़े थे और अभी कहाँ है ? कभी  जीवन लक्ष्य से भटक जाते है या फिर जीवन लक्ष्य के लिए केंद्रित नहीं हो पाते है।   यहाँ तक कि कभी - कभी वापस लक्ष्य का पाना असंभव सा प्रतीत होता है  या फिर कहूं कि दुबारा से शुरू करने के लिए समय या फिर शरीर या फिर दिमाग साथ देने के लिए तैयार नहीं हो पाता। जीवन की थकान और जीवन में थकान के अनुभव के चलते जीवन लक्ष्य का गला घोंटकर समाप्त करना होता है और  स्वयं को संतुष्ट करने के रास्ते और तरीके ढूंढते है।

उद्देश्य: 

आत्म केंद्रित होकर स्वयं की ऊर्जा और ताकत को पहचानना।

प्रेक्षण प्रणाली (टूल्स):

 शरीर एवं शारीरिक क्रियाओं को समझाना, मानसिक, मनोभाव एवं आवश्यकता को समझना, जीवन और जीवन लक्ष्य को समझना, नियति के लिए अग्रसर होना और समझना।

परीक्षण:

 योग क्रियाओं के द्वारा, पारम्परिक ऊर्जा विधि एवं क्रियाओं के द्वारा, साहित्य एवं दर्शन के द्वारा, ज्योतिषीय गणित एवं गणनाओं के द्वारा, भौतिकी एवं आध्यात्मिक भौतिकी की तकनीकी क्रियाओं के द्वारा।

 

परिणाम: 

हम स्वयं की ऊर्जा पर केंद्रित होकर, अपनी ऊर्जा का अनुभव पाकर अपने जीवन को कम से कम तनावपूर्ण और अधिक संतुष्ट एवं खुशहाल बना सकते है। 

 :Digamber Chamoli

21/04/22

प्रेम और आत्मीय रिश्ता:

विषय के बारे में:

 कहते है इस जीवन में किसी से भी मिलना एक अर्थ, एक घटना होती है और प्रेम से मिलना अथवा प्रेम होना एक ईश्वरीय घटना। यदि जीवन में प्रेम न हो, तो जीवन नीरस हो जाता है। प्रेम का अभाव जीवन को रुग्ण, निष्ठुर और उदास बना देता है। प्रेम है तो जीवन में उत्साह है, आनंद है, उमंग है, कल्पना है, रस है, कल्पनाशीलता है, जीवन के चारों ओर सौंदर्य है, सुंदरता है।

लेकिन उतना ही मुश्किल इसका संतुलन बनाना होता है, हर कोई संतुलन बनाने में सफल भी होता है लेकिन असफल भी। मुश्किल उस वक्त होती है जब कभी हमें असंतुलन के समय कोई भी उपाय नहीं दिखता है।

उद्देश्य :

 यहाँ इस रिट्रीट में हर एक प्रेम को संतुलित कर दिव्य प्रेम बनाने का प्रयास है।

प्रेक्षण प्रणाली:

 भावों को समझना, स्थिति एवं परिस्तिथि को समझना, गंतव्य, नियति एवं कर्म को समझना, ह्रदय एवं आत्मीय प्रेम को समझना।

परीक्षण:

 प्रश्न एवं शब्दावली, योग, जीवन, परिस्तिथि एवं कर्मों का जुड़ाव एवं सम्बंधित अभ्यास । योग एवं विचारों का अभ्यास। शांति, समर्पण एवं चेतना का अभ्यास। 

परिणाम:

 कर्म, प्रेम और दिव्य प्रेम के बीच अंतर को अभ्यास, भाषा एवं परिभाषा के द्वारा समझकर जीवन का उत्साहवर्धक एवं आनंदमय बनना। 


:Digamber Chamoli

27/04/22